Quran Quote  : 

कुरान मजीद-3:151 सुरा हिंदी अनुवाद, लिप्यंतरण और तफ़सीर (तफ़सीर).

سَنُلۡقِي فِي قُلُوبِ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ ٱلرُّعۡبَ بِمَآ أَشۡرَكُواْ بِٱللَّهِ مَا لَمۡ يُنَزِّلۡ بِهِۦ سُلۡطَٰنٗاۖ وَمَأۡوَىٰهُمُ ٱلنَّارُۖ وَبِئۡسَ مَثۡوَى ٱلظَّـٰلِمِينَ

लिप्यंतरण:( Sanulqee fee quloobil lazeena kafarur ru'ba bimaaa ashrakoo billaahi maa lam yunazzil bihee sultaana wa ma'wahumun Naar; wa bi'sa maswaz zaalimeen )

बल्कि अल्लाह तुम्हारा संरक्षक है, और वही सबसे अच्छा मददगार है [323]।

सूरा आयत 151 तफ़सीर (टिप्पणी)



  • मुफ़्ती अहमद यार खान

📖 सूरा आले-इमरान – आयत 150 की तफ़्सीर

 

✅ [323] अल्लाह ही इताअत के लायक़ है

चूंकि अल्लाह हमारा संरक्षक है, इसलिए उसी की इताअत करना सबसे ज़्यादा उचित है। हर बंदा अपने मालिक की फ़ितरी तौर पर फरमांबरदारी करता है, तो फिर अल्लाह की क्यों नहीं, जो हमारा पैदा करने वाला, पालने वाला और हर हाल में मदद करने वाला है? यह आयत एक तज़किरा भी है और तसल्ली भी, कि सच्ची मदद और सहारा सिर्फ़ अल्लाह से मिलता है, ना कि दुनिया की ताक़तों या झूठे मददगारों

Ibn-Kathir

The tafsir of Surah Imran verse 151 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Imran ayat 149 which provides the complete commentary from verse 149 through 153.

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