लिप्यंतरण:( Balaa man awfaa bi'ahdihee wattaqaa fainnal laaha yuhibbul muttaqeen )
हाँ, जो कोई अपना वादा पूरा करता है [161] और अल्लाह से डरता है, तो निश्चय ही अल्लाह उन पर महरबान होता है जो परहेज़गार हैं।
इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि:
➡️ हर प्रकार का वादा निभाना अनिवार्य है — चाहे वह वादा अल्लाह से किया गया हो, रसूल ﷺ से, मुरशिद (रूहानी रहबर) से, निकाह के समय जीवनसाथी से, या फिर रिश्तेदारों से।
➡️ इस आयत में ईमानदारी, ज़िम्मेदारी, और तक़वा (अल्लाह का डर) को इस्लामी शरीअत के मूल सिद्धांतों में से एक बताया गया है।
📌 वादे का पालन सिर्फ़ सामाजिक अनुशासन नहीं बल्कि इबादत का दर्जा रखता है, और इसकी अदायगी पर अल्लाह की मोहब्बत हासिल होती है।
🟢 जिनके दिलों में तक़वा होता है, वे कभी वादाख़िलाफ़ी नहीं करते, और ऐसे ही लोग अल्लाह के सच्चे महबूब होते हैं।
The tafsir of Surah Imran verse 76 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Imran ayat 75 which provides the complete commentary from verse 75 through 76.

सूरा आयत 76 तफ़सीर (टिप्पणी)