लिप्यंतरण:( Wa laa tahinoo wa laa tahzanoo wa antumul a'lawna in kuntum mu'mineen )
कमज़ोर न पड़ो और न ही ग़म खाओ, और तुम ही सर्वोच्च रहोगे अगर तुम ईमान रखते हो [294]।
यह अल्लाह का सच्चा और पुख़्ता वादा है कि ईमानदार लोग कभी ज़लील नहीं होंगे। हम ही हैं जिन्होंने सच्चे ईमान और शर्तों को पूरा नहीं किया, और नतीजतन हमारी जिल्लत हुई। इस आयत से पता चलता है कि हज़रत मुहम्मद ﷺ के सभी सहाबा, खासकर चार खलीफ़ा-ए-राशिदीन, सच्चे मोमिन थे। उन्होंने अपने ईमान को साबित किया, इसलिए अल्लाह ने उन्हें ख़िलाफ़त, हुकूमत और रहनुमाई अता की। उनका ऊँचा मुक़ाम और इज़्ज़त सच्चे ईमान और सब्र का नतीजा थी।
The tafsir of Surah Imran verse 139 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Imran ayat 137 which provides the complete commentary from verse 137 through 143.

सूरा आयत 139 तफ़सीर (टिप्पणी)