लिप्यंतरण:( Qaalat Rabbi annaa yakoonu lee waladunw wa lam yamsasnee basharun qaala kazaalikil laahu yakhluqu maa yashaaa'; izaa qadaaa amran fa innamaa yaqoolu lahoo kun fayakoon )
मरयम ने कहा: ऐ मेरे रब! मेरे कैसे बेटा होगा जबकि मुझे किसी मर्द ने छुआ भी नहीं? फ़रिश्ते ने कहा: अल्लाह ऐसे ही करता है जो वह चाहता है। जब वह किसी चीज़ का हुक्म देता है, तो बस कहता है "हो जा", और वह हो जाती है [102]।
सैय्यदा मरयम (रज़ियल्लाहु अन्हा) ने यह सवाल हैरानी के साथ किया, शक या इंकार के साथ नहीं।
उन्होंने पूछा कि बग़ैर मर्द के संपर्क के उनके यहाँ बेटा कैसे होगा?
फ़रिश्ते ने जवाब दिया कि अल्लाह तआला प्राकृतिक क़ानूनों का मोहताज नहीं, वह जो चाहे कर सकता है।
मरयम (रज़ि.) माँ बनेंगी, लेकिन फिर भी कुँवारी रहेंगी, और यह अल्लाह की कुदरत का करिश्मा होगा।
जब अल्लाह किसी चीज़ का इरादा करता है, तो बस "कुन" (हो जा) कहता है, और वह वजूद में आ जाती है।
यह आयत अल्लाह की ताक़त और उसके हुक्म की बेजोड़ क़ुव्वत को बयान करती है।
The tafsir of Surah Imran verse 47 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Imran ayat 45 which provides the complete commentary from verse 45 through 47.

सूरा आयत 47 तफ़सीर (टिप्पणी)