लिप्यंतरण:( Ulaaa'ika jazaaa'uhum maghfiratum mir Rabbihim wa Jannaatun tajree min tahtihal anhaaru khaalideena feeha; wa ni'ma ajrul 'aamileen )
ऐसे लोगों को उनके रब की तरफ़ से माफ़ी और वो बाग़ मिलेंगे जिनके नीचे नहरें बहती हैं, जिनमें वे हमेशा रहेंगे। और नेक काम करने वालों का बदला कितना अच्छा है।
इस आयत में उन लोगों का इनाम बताया गया है जो गुनाहों के बाद सच्ची तौबा करते हैं और नेक अमल अपनाते हैं। अल्लाह उन्हें सबसे पहले अपनी माफ़ी अता करता है, फिर ऐसे बाग़ देता है जिनके नीचे नहरें बहती हैं, जहाँ वे हमेशा के लिए रहेंगे। यह इनाम सिर्फ़ नेकी करने वालों के लिए है, और अल्लाह का इनाम बेहतरीन है।
The tafsir of Surah Imran verse 136 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Imran ayat 130 which provides the complete commentary from verse 131 through 136.

सूरा आयत 136 तफ़सीर (टिप्पणी)