Quran Quote  : 

कुरान मजीद-3:155 सुरा हिंदी अनुवाद, लिप्यंतरण और तफ़सीर (तफ़सीर).

إِنَّ ٱلَّذِينَ تَوَلَّوۡاْ مِنكُمۡ يَوۡمَ ٱلۡتَقَى ٱلۡجَمۡعَانِ إِنَّمَا ٱسۡتَزَلَّهُمُ ٱلشَّيۡطَٰنُ بِبَعۡضِ مَا كَسَبُواْۖ وَلَقَدۡ عَفَا ٱللَّهُ عَنۡهُمۡۗ إِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٌ حَلِيمٞ

लिप्यंतरण:( Innal lazeena tawallaw minkum yawmal taqal jam'aani innamas tazallahumush Shaitaanu biba'di maa kasaboo wa laqad 'afal laahu 'anhum; innnal laaha Ghafoorun Haleem )

निःसंदेह, तुममें से जो लोग उस दिन पीछे हट गए जब दो सेनाएँ आमने-सामने हुईं [344], उन्हें शैतान ने फिसलाया [346] उनके कुछ (बीते हुए) कामों के कारण [347], लेकिन अल्लाह ने उन्हें माफ़ कर दिया [348]। बेशक, अल्लाह बड़ा माफ़ करने वाला, बड़ा नरम मिज़ाज है [349]।

सूरा आयत 155 तफ़सीर (टिप्पणी)



  • मुफ़्ती अहमद यार खान

📖 सूरा आले-इमरान – आयत 155 की तफ़्सीर

 

✅ [344] जो सहाबा पीछे हटे

उहुद की जंग में सिर्फ़ 14 सहाबा — जिनमें हज़रत अबू बक्र, उमर और अली (रज़ि०) शामिल थे — नबी ﷺ के साथ डटे रहे। बाक़ी सहाबा डर और उलझन के मारे मैदान छोड़कर हट गए।

✅ [345] उहुद की घटना की ओर इशारा

नबी ﷺ ने 50 सहाबा को उहुद के दर्रे पर तैनात किया था और साफ़ हुक्म दिया था कि किसी हाल में अपनी जगह न छोड़ें। जब शुरू में मुसलमानों को जीत मिली और कुफ्फ़ार भागने लगे, तो ये तीरंदाज़ ग़नीमत समेटने के लिए नीचे उतर गए। इस ग़लती से कुफ्फ़ार ने पीछे से हमला कर दिया और मुसलमानों को भारी नुक़सान हुआ।

✅ [346] शैतान की चाल और अल्लाह की रहमत

इससे दो बातें सामने आती हैं:

  1. सहाबा का मैदान छोड़ना गुनाह नहीं बल्कि भूल थी — जैसा कि हज़रत आदम (अ.स.) से भी भूल हुई थी।
  2. शैतान का दखल इंसान की कमज़ोरी के वक़्त ही असर करता है, अल्लाह के मुक़र्रब बंदों पर उसका कोई ज़ोर नहीं।

✅ [347] उनके "कुछ कर्म"

यह उन तीरंदाज़ों की बात है जिन्होंने दर्रा छोड़ दिया। उनका इरादा बुरा नहीं था, लेकिन नतीजा बड़ा गंभीर निकला। इस वाक़ये से सबक़ मिलता है कि छोटी ग़लती भी बड़ा असर डाल सकती है

✅ [348] अल्लाह की तरफ़ से माफ़ी

क्या ही करम वाला एलान है! अल्लाह तआला ने इन नेक सहाबा की ग़लती को माफ़ फ़रमा दिया। अब जो कोई इन पर उंगली उठाए, उसका ईमान से कोई ताल्लुक नहीं।

✅ [349] दोनों ग़लतियों की माफ़ी

इस आयत में दो गुटों का ज़िक्र है:

  1. तीरंदाज़ों का जो अपनी जगह छोड़ गए
  2. वो जो मैदान से भागे
    दोनों के लिए साफ़ तौर पर फ़रमाया: “अल्लाह ने उन्हें माफ़ कर दिया।” इस से ये भी पता चलता है कि एक गिरोह की ग़लती, दूसरे को भी नुक़सान पहुँचा सकती है।

Ibn-Kathir

The tafsir of Surah Imran verse 155 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Imran ayat 154 which provides the complete commentary from verse 154 through 155.

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