Quran Quote  : 

कुरान मजीद-3:173 सुरा हिंदी अनुवाद, लिप्यंतरण और तफ़सीर (तफ़सीर).

ٱلَّذِينَ قَالَ لَهُمُ ٱلنَّاسُ إِنَّ ٱلنَّاسَ قَدۡ جَمَعُواْ لَكُمۡ فَٱخۡشَوۡهُمۡ فَزَادَهُمۡ إِيمَٰنٗا وَقَالُواْ حَسۡبُنَا ٱللَّهُ وَنِعۡمَ ٱلۡوَكِيلُ

लिप्यंतरण:( Allazeena qaala lahumun naasu innan naasa qad jama'oo lakum fakhshawhum fazaadahum emaananw wa qaaloo hasbunal laahu wa ni'malwakeel )

जिनसे लोगों (मुनाफ़िक़ों) ने कहा: "लोग तुम्हारे ख़िलाफ़ जमा हो चुके हैं, इसलिए उनसे डर जाओ" — लेकिन इससे उनका ईमान और बढ़ गया [392], और उन्होंने कहा: "हमारे लिए अल्लाह काफी है, और वह क्या ही बेहतरीन कारसाज़ है [393]।"

सूरा आयत 173 तफ़सीर (टिप्पणी)



  • मुफ़्ती अहमद यार खान

📖 सूरा आले-इमरान – आयत 173 की तफ़्सीर

 

✅ [392] इम्तिहानों से ईमान में बढ़ोतरी

इस आयत से यह मालूम होता है कि ईमान की शिद्दत और सच्चाई इम्तिहानों से बढ़ती है। यह ज़रूरी नहीं कि ईमान की तादाद बढ़े, लेकिन उसका ख़ुलूस और यक़ीन गहरा होता चला जाता है।

जब सच्चे मोमिनों को डराया या धमकाया जाता है, तो वो पीछे नहीं हटते — बल्कि उनका यक़ीन और मजबूत होता है

डर और मुसीबतें उनके लिए रूहानी तरक़्क़ी का ज़रिया बन जाती हैं। इस तरह की दुनिया की आज़माइशें ईमान वालों के लिए अल्लाह की रहमत होती हैं, जो उन्हें और करीब ले आती हैं।

✅ [393] तवक्कुल की विरासत – "हसबुनल्लाहु व नि’मल वकील"

नाज़िल होने का सबब: यह आयत बद्र की दूसरी जंग के बारे में है, जो 4 हिजरी में, उहुद की जंग के एक साल बाद हुई थी।

उहुद के बाद अबू सुफ़यान ने ऐलान किया था कि अगली जंग बद्र में होगी। मुसलमान तयशुदा वक्त पर बद्र पहुँचे, लेकिन अबू सुफ़यान डर की वजह से नहीं आया।

उसने नुईम बिन मसऊद अशजई को भेजा ताकि मुसलमानों को डराकर वापस भेज सके — उसने कहा कि दुश्मनों की बड़ी फौज आ रही है

लेकिन ये मक्कारी कामयाब न हो सकी — बल्कि मुसलमानों ने पूरा तवक्कुल दिखाते हुए कहा:
"हमारे लिए अल्लाह काफी है, और वह क्या ही बेहतरीन कारसाज़ है।"

इससे हमें सीख मिलती है कि जब भी कोई परेशानी, डर या खतरा हो — इस आयत को पढ़ना चाहिए।

यह एक मक़बूल और पुर असर दुआ है जो हिम्मत, ईमान और अल्लाह पर पूरी उम्मीद का इज़हार करती है।

Ibn-Kathir

The tafsir of Surah Imran verse 173 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Imran ayat 169 which provides the complete commentary from verse 169 through 175.

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