लिप्यंतरण:( Fakaifa izaa jama'naahum li Yawmil laa raiba fee wa wuffiyat kullu nafsim maa kasabat wa hum laa yuzlamoon )
25. "तो फिर क्या होगा जब हम उन्हें उस दिन इकठ्ठा करेंगे जिस दिन कोई शक़ नहीं होगा? हर आत्मा को पूरा-पूरी उसका दिया जाएगा जो उसने कमाया है [53], और उन पर कोई ज़ुल्म नहीं किया जाएगा।"
👉 इस आयत में आख़िरत के दिन के न्याय का ज़िक्र है।
⚠️ साथ ही, अल्लाह की रहमत से अच्छे कामों को बढ़ा भी दिया जा सकता है, और गुनाहों को माफ़ या कम भी किया जा सकता है।
📌 सबक़:
अल्लाह का न्याय बिल्कुल सही और पूरा है, मगर वह बहुत ही दयालु और रहम करने वाला भी है।
इसलिए इंसान को हमेशा अच्छा करने की कोशिश करनी चाहिए और अपने गुनाहों से तौबा (पश्चाताप) करनी चाहिए।
The tafsir of Surah Imran verse 25 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Imran ayat 23 which provides the complete commentary from verse 23 through 25.

सूरा आयत 25 तफ़सीर (टिप्पणी)