लिप्यंतरण:( Afamanit taba'a Ridwaanal laahi kamam baaa'a bisakhatim minal laahi wa ma'waahu Jahannam; wa bi'sal maseer )
तो क्या वह व्यक्ति जो अल्लाह की रज़ा का पीछे करता है [367], उस जैसे हो सकता है जो अल्लाह का ग़ज़ब अपने ऊपर ले आता है [368], और जिसका ठिकाना जहन्नम है? और वह क्या ही बुरा ठिकाना है लौटने का।
इससे मुराद वे लोग हैं जो अल्लाह की ख़ुशी हासिल करने के लिए कोशिश करते हैं,
जैसे कि मुहाजिरीन, अंसार और सच्चे मोमिन —
जिन्होंने सही अक़ीदा रखा और नेक अमल किए,
और सिर्फ अल्लाह की रज़ा के लिए सब कुछ किया।
इनका अंजाम बहुत उम्दा होगा, और आख़िरत में उनका दर्जा बहुत ऊँचा होगा।
यह इशारा है मुनाफिक़ों और काफ़िरों की तरफ़,
जिन्होंने झूठ, इनकार और दोहरी ज़िंदगी जी कर अल्लाह की नाराज़गी हासिल की।
ये लोग सच्चे मोमिनों के बराबर नहीं हो सकते।
इनका अंजाम है जहन्नम,
जो कि बहुत ही बुरा ठिकाना है लौटने का —
और यह उनके अपने ही बुरे अमाल का नतीजा है।
The tafsir of Surah Imran verse 162 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Imran ayat 159 which provides the complete commentary from verse 159 through 164.

सूरा आयत 162 तफ़सीर (टिप्पणी)