लिप्यंतरण:( Innamaa zaalikumush Shaitaanu yukhawwifu awliyaaa'ahoo falaa takhaafoohum wa khaafooni in kuntum mu'mineen )
यह तो बस शैतान ही है जो तुम्हें अपने साथियों से डराता है। सो उनसे मत डरो, बल्कि मुझसे डरो अगर तुम सच्चे ईमान वाले हो।
इस आयत में अल्लाह तआला ने बताया कि डर का असली ज़रिया शैतान है — वह खुद से नहीं, बल्कि अपने साथियों (यानि मुनाफिक़ों और काफ़िरों) से डराता है।
इससे कई अहम बातें सामने आती हैं:
यह आयत क़ियामत तक के तमाम मुसलमानों के लिए एक बड़ा सबक और हौसला है।
इसमें तीन बड़ी बातें बताई गई हैं:
आख़िर में, हुक्म साफ़ है:
👉 "मुझसे डरो" — यानी अल्लाह से,
👉 "अगर तुम सच्चे मोमिन हो।"
अल्लाह का डर ही ईमान की बुनियाद और असली ताक़त है।
The tafsir of Surah Imran verse 175 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Imran ayat 169 which provides the complete commentary from verse 169 through 175.

सूरा आयत 175 तफ़सीर (टिप्पणी)