Quran Quote  : 

कुरान मजीद-3:175 सुरा हिंदी अनुवाद, लिप्यंतरण और तफ़सीर (तफ़सीर).

إِنَّمَا ذَٰلِكُمُ ٱلشَّيۡطَٰنُ يُخَوِّفُ أَوۡلِيَآءَهُۥ فَلَا تَخَافُوهُمۡ وَخَافُونِ إِن كُنتُم مُّؤۡمِنِينَ

लिप्यंतरण:( Innamaa zaalikumush Shaitaanu yukhawwifu awliyaaa'ahoo falaa takhaafoohum wa khaafooni in kuntum mu'mineen )

यह तो बस शैतान ही है जो तुम्हें अपने साथियों से डराता है। सो उनसे मत डरो, बल्कि मुझसे डरो अगर तुम सच्चे ईमान वाले हो।

सूरा आयत 175 तफ़सीर (टिप्पणी)



  • मुफ़्ती अहमद यार खान

📖 सूरा आले-इमरान – आयत 175 की तफ़्सीर

 

✅ [395] शैतान और उसके साथी डर फैलाते हैं

इस आयत में अल्लाह तआला ने बताया कि डर का असली ज़रिया शैतान है — वह खुद से नहीं, बल्कि अपने साथियों (यानि मुनाफिक़ों और काफ़िरों) से डराता है।

इससे कई अहम बातें सामने आती हैं:

  • जो लोग शैतान की राह पर चलते हैं, वो उसी की तरह हो जाते हैं — शैतानी फ़ितरत वाले इंसान।
  • जो उनकी बातों में आ जाए, वह शैतान का साथी बन जाता है।
  • मोमिन को चाहिए कि वह जिन्न और इंसान दोनों किस्म के शैतानों से होशियार रहे।
  • शैतान का असल हथियार 'वहम' और 'डर' है — वह दिलों में खौफ और शक डालता है।
  • लेकिन सच्चा मोमिन कभी इन बातों से नहीं घबराता — उसका दिल मज़बूत और यक़ीन से भरा होता है।

✅ [396] अल्लाह का डर ही सच्चा डर है

यह आयत क़ियामत तक के तमाम मुसलमानों के लिए एक बड़ा सबक और हौसला है।

इसमें तीन बड़ी बातें बताई गई हैं:

  • अगर मुसलमानों के दिलों में सिर्फ अल्लाह का डर हो, तो कोई दुश्मन, मुनाफिक़ या काफ़िर उन्हें नुकसान नहीं पहुँचा सकता।
  • जो अल्लाह से डरता है, दुनिया उससे डरती है, लेकिन वह किसी और से नहीं डरता।
  • अल्लाह का डर ताक़त देता है, जबकि मख़्लूक़ (दुनिया) का डर कमज़ोरी और मायूसी लाता है।

आख़िर में, हुक्म साफ़ है:
👉 "मुझसे डरो" — यानी अल्लाह से,
👉 "अगर तुम सच्चे मोमिन हो।"

अल्लाह का डर ही ईमान की बुनियाद और असली ताक़त है।

Ibn-Kathir

The tafsir of Surah Imran verse 175 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Imran ayat 169 which provides the complete commentary from verse 169 through 175.

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