लिप्यंतरण:( Alhaqqu mir Rabbika falaa takum minal mumtareen )
निश्चय ही सत्य तुम्हारे रब की ओर से है। अतः तुम संशय करने वालों में न हो जाओ [130]
इस आयत में यह दोहराया गया है कि:
हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) बिना पिता के पैदा हुए,
वह अल्लाह के बंदे हैं, न कि अल्लाह या अल्लाह के बेटे।
इसलिए इन सच्चाइयों में शक करना ईमान से भटक जाना है।
इसी आधार पर नासारा (ईसाई) और क़ादियानी—जो नबूवत की अंतिमता या पूर्णता को नहीं मानते—इस्लामी अक़ीदे में काफ़िर माने जाते हैं।
The tafsir of Surah Imran verse 60 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Imran ayat 59 which provides the complete commentary from verse 59 through 63.

सूरा आयत 60 तफ़सीर (टिप्पणी)