Quran Quote  : 

कुरान मजीद-3:43 सुरा हिंदी अनुवाद, लिप्यंतरण और तफ़सीर (तफ़सीर).

يَٰمَرۡيَمُ ٱقۡنُتِي لِرَبِّكِ وَٱسۡجُدِي وَٱرۡكَعِي مَعَ ٱلرَّـٰكِعِينَ

लिप्यंतरण:( Yaa Maryamu uqnutee li Rabbiki wasjudee warka'ee ma'ar raaki'een )

ऐ मरयम! अपने रब की आज्ञाकारी बन, और सज्दा कर, और रुकू करने वालों के साथ रुकू कर [95]।

सूरा आयत 43 तफ़सीर (टिप्पणी)



  • मुफ़्ती अहमद यार खान

📖 सूरह आले-इमरान – आयत 43 की तफ़्सीर

 

✅ [95] सैय्यदा मरयम (रज़ि.) को दिए गए हुक्म से सबक

इस आयत से चार महत्वपूर्ण हुक्म सामने आते हैं:

  • रुकू (झुकना) पहले उम्मतों की नमाज़ का हिस्सा था, जिसमें सैय्यदा मरयम (रज़ि.) की उम्मत भी शामिल है
  • औरतें मर्दों की जमाअत में नमाज़ अदा कर सकती हैं, बशर्ते कि परदा या हिजाब के ज़रिये सही हदबंदी हो
  • औरतें औरतों की अलग जमाअत की इमामत नहीं कर सकतीं, क्योंकि यहाँ शब्द “राकिईन” (रुकू करने वाले) मर्दाना सीग़ा में है, जिससे पता चलता है कि यह मर्द इमाम की जमाअत के साथ नमाज़ का हुक्म था।
  • अरबी में “वा” (وَاو) हर बार क्रम या क्रमिकता (order) नहीं दर्शाता। यहाँ सज्दा पहले और रुकू बाद में आया, जबकि नमाज़ में पहले रुकू और फिर सज्दा होता है।
    ऐसा ही एक उदाहरण है: “ऐ ईसा! मैं तुझे मौत तक पहुँचा दूँगा और तुझे अपनी ओर उठा लूँगा...” (सूरह 3:55), जबकि हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) को पहले उठाया गया और मौत बाद में होगी

Ibn-Kathir

The tafsir of Surah Imran verse 43 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Imran ayat 42 which provides the complete commentary from verse 42 through 44.

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