लिप्यंतरण:( Zaalika natloohu 'alaika minal Aayaati wa Zikril Hakeem )
“यह वही आयतें हैं जो हम तुम्हें सुनाते हैं [127] — हिकमत भरा पैग़ाम।”
इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है: “हम तुम्हें सुनाते हैं”,
जबकि वास्तव में कुरआन की तिलावत हज़रत जिबरील (अ.स) के ज़रिए होती थी।
🔹 इसका मतलब यह है कि:
☝️ इसका मक़सद यह दिखाना है कि अल्लाह तआला अपने नेक और मुक़र्रब बंदों के ज़रिए अपने काम अंजाम देता है, और ये सब उसके हुक्म और इरादे के तहत होता है — किसी की ज़ाती ताक़त से नहीं।
The tafsir of Surah Imran verse 58 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Imran ayat 55 which provides the complete commentary from verse 55 through 58.

सूरा आयत 58 तफ़सीर (टिप्पणी)