लिप्यंतरण:( Rabbanaaa innaka jaami 'un-naasi li Yawmin laa raiba feeh; innal laaha laa yukhliful mee'aad )
9. हे हमारे पालनहार! निःसंदेह, तू ही है वह जो सभी लोगों को एकत्र करेगा [16] उस दिन के लिए, जिसमें कोई संदेह नहीं है। निःसंदेह, अल्लाह अपने वादे के खिलाफ़ नहीं करता [17]।
✅ [16] अल्लाह सभी इंसानों को एकत्र करेगा
इस आयत में "जामिउन्नास" (लोगों को एकत्र करने वाला) शब्द से स्पष्ट होता है कि क़ियामत के दिन अल्लाह सभी इंसानों को — पहले व्यक्ति से लेकर आख़िरी तक — एक साथ एक ही मैदान में जमा करेगा।
मुख्य बिंदु:
✅ [17] अल्लाह अपने वादे के खिलाफ़ नहीं जाता
इस आयत के अंत में अल्लाह के एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण गुण की पुष्टि की गई है — वह अपने वादे को कभी नहीं तोड़ता।
इससे हमें शिक्षा मिलती है:
The tafsir of Surah Imran verse 9 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Imran ayat 5 which provides the complete commentary from verse 5 through 9.

सूरा आयत 9 तफ़सीर (टिप्पणी)