Quran Quote  : 

कुरान मजीद-3:116 सुरा हिंदी अनुवाद, लिप्यंतरण और तफ़सीर (तफ़सीर).

إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ لَن تُغۡنِيَ عَنۡهُمۡ أَمۡوَٰلُهُمۡ وَلَآ أَوۡلَٰدُهُم مِّنَ ٱللَّهِ شَيۡـٔٗاۖ وَأُوْلَـٰٓئِكَ أَصۡحَٰبُ ٱلنَّارِۖ هُمۡ فِيهَا خَٰلِدُونَ

लिप्यंतरण:( Innal lazeena kafaroo lan tughniya 'anhum amwaaluhum wa laaa awlaaduhum minal laahi shai'anw wa ulaaa'ika Ashaabun Naar; hum feehaa khaalidoon )

"निःसंदेह, जिन लोगों ने कुफ्र किया, न तो उनका माल उनके कुछ काम आएगा, न ही उनकी औलाद अल्लाह के मुक़ाबले में। वे तो जहन्नम वाले हैं, और हमेशा उसी में रहेंगे।"

सूरा आयत 116 तफ़सीर (टिप्पणी)



  • मुफ़्ती अहमद यार खान

📖 सूरा आले-इमरान – आयत 116 की तफ़्सीर

 

✅ [255] माल और औलाद काफ़िरों को कोई फायदा नहीं देंगे

इस आयत से यह समझा जाता है कि:

  • ईमान वालों के लिए, अल्लाह की रहमत से, माल और नेक औलाद आख़िरत में फ़ायदे का सबब बन सकते हैं।
    • जैसे: जो माल अल्लाह की राह में ख़र्च किया गया,
    • और जो औलाद दीनी तालीम और नेकियों में आगे बढ़ी — ये सब सवाब और शफ़ाअत (सिफ़ारिश) का ज़रिया बन सकते हैं।
  • मगर काफ़िरों के लिए, उनका कितना भी माल-दौलत या औलाद क्यों न हो,
    • यह सब अल्लाह के अज़ाब से उन्हें नहीं बचा सकेगा
    • यह आयत एक खुली चेतावनी है कि दुनियावी ताक़तें आख़िरत में बिलकुल बेकार हैं, अगर ईमान नहीं है।

➡️ इसका साफ़ मतलब यह है कि बग़ैर ईमान, किसी भी सांसारिक साधन या रिश्ते का कोई मूल्य नहीं होगा जब इंसान अल्लाह के सामने खड़ा होगा।

Ibn-Kathir

The tafsir of Surah Imran verse 116 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Imran ayat 113 which provides the complete commentary from verse 113 through 117.

Sign up for Newsletter