लिप्यंतरण:( Rabbanaa laa tuzigh quloobanaa ba'da iz hadaitanaa wa hab lanaa mil ladunka rahmah; innaka antal Wahhaab )
8. हे हमारे पालनहार! हमारे दिलों को टेढ़ा न कर [14], जबकि तू हमें मार्गदर्शन दे चुका है। और हमें अपनी रहमत प्रदान कर। निःसंदेह, तू ही सबसे अधिक देने वाला है [15]।
✅ [14] मार्गदर्शन के बाद भटकने का डर
यह दुआ इस चिंता को दर्शाती है कि कहीं हम सत्य मार्ग पर आने के बाद उससे फिर भटक न जाएँ। "दिलों को टेढ़ा न कर" का अर्थ है: हमें गुमराही, संदेह या हठधर्मिता में न डाल। यह दिखाता है कि केवल मार्गदर्शन पा लेना ही पर्याप्त नहीं — उस पर स्थिर रहना भी अल्लाह की एक विशेष कृपा है।
✅ [15] ईमान पर स्थिरता सिर्फ़ अल्लाह के हाथ में है
यह भाग यह सिखाता है कि:
The tafsir of Surah Imran verse 8 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Imran ayat 5 which provides the complete commentary from verse 5 through 9.

सूरा आयत 8 तफ़सीर (टिप्पणी)