Quran Quote  : 

कुरान मजीद-3:8 सुरा हिंदी अनुवाद, लिप्यंतरण और तफ़सीर (तफ़सीर).

رَبَّنَا لَا تُزِغۡ قُلُوبَنَا بَعۡدَ إِذۡ هَدَيۡتَنَا وَهَبۡ لَنَا مِن لَّدُنكَ رَحۡمَةًۚ إِنَّكَ أَنتَ ٱلۡوَهَّابُ

लिप्यंतरण:( Rabbanaa laa tuzigh quloobanaa ba'da iz hadaitanaa wa hab lanaa mil ladunka rahmah; innaka antal Wahhaab )

8. हे हमारे पालनहार! हमारे दिलों को टेढ़ा न कर [14], जबकि तू हमें मार्गदर्शन दे चुका है। और हमें अपनी रहमत प्रदान कर। निःसंदेह, तू ही सबसे अधिक देने वाला है [15]।

सूरा आयत 8 तफ़सीर (टिप्पणी)



  • मुफ़्ती अहमद यार खान

[14] मार्गदर्शन के बाद भटकने का डर
यह दुआ इस चिंता को दर्शाती है कि कहीं हम सत्य मार्ग पर आने के बाद उससे फिर भटक न जाएँ। "दिलों को टेढ़ा न कर" का अर्थ है: हमें गुमराही, संदेह या हठधर्मिता में न डाल। यह दिखाता है कि केवल मार्गदर्शन पा लेना ही पर्याप्त नहीं — उस पर स्थिर रहना भी अल्लाह की एक विशेष कृपा है।

[15] ईमान पर स्थिरता सिर्फ़ अल्लाह के हाथ में है
यह भाग यह सिखाता है कि:

  • केवल ज्ञानी या धार्मिक होना ही पर्याप्त नहीं,
  • बल्कि अंत तक ईमान पर कायम रहना अल्लाह की रहमत और इनायत पर निर्भर करता है।
    "तू ही सबसे अधिक देने वाला है" — यानी वह अल-वाह्हाब है, जो बिना किसी कारण या बदले के भी अपनी नेमतें प्रदान करता है। इसलिए हर मोमिन को चाहिए कि वह आजीवन यह दुआ करता रहे।

Ibn-Kathir

The tafsir of Surah Imran verse 8 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Imran ayat 5 which provides the complete commentary from verse 5 through 9.

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