लिप्यंतरण:( Qaala in kunnta ji'ta bi Aayatin fa'tibihaa in kunnta minas saadiqeen )
उसने कहा: "अगर तू कोई निशानी लेकर आया है, तो उसे पेश कर, अगर तू सच्चा है।"
इस आयत में फ़िरऔन की घमंडी चुनौती को बयान किया गया है। उसने मूसा अलैहिस्सलाम की सच्चाई और यक़ीन को देखने और सुनने के बावजूद कहा: "अगर सच्चे हो, तो मोज़िज़ा दिखाओ।" यह इनकार करने वालों की आम आदत होती है—वे हक़ को दिल से नहीं, ज़िद और तकब्बुर से देखते हैं। फ़िरऔन को हक़ की तलाश नहीं थी, बल्कि वह मूसा से मज़ाक और इन्कारी अंदाज़ में मोज़िज़ा माँग रहा था।
The tafsir of Surah Al-A’raf verse 106 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah A’raf ayat 104 which provides the complete commentary from verse 104 through 106.

सूरा आयत 106 तफ़सीर (टिप्पणी)