लिप्यंतरण:( Wa kazaalika nufassilul Aayaati wa la'allahum yarji'oon )
और इसी तरह हम अपनी आयतें अलग-अलग अंदाज़ से बयान करते हैं, ताकि लोग (हमारी तरफ) रुजू़ करें [401]।
अल्लाह तआला अपनी क़ुदरत की निशानियों और दलीलों को तरह-तरह से बयान करता है — कहीं अज़ाब की चेतावनी देकर डराया जाता है, कहीं इनाम का वादा करके उम्मीद दिलाई जाती है, और कहीं अक़्ली दलीलें पेश की जाती हैं।
इसका मक़सद यह है कि हर इंसान, चाहे उसका मिज़ाज कैसा भी हो और उसकी अक़्ल का दर्जा जो भी हो, हक़ की तरफ रुजू़ करने का रास्ता पा सके।
The tafsir of Surah Al-A’raf verse 174 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah A’raf ayat 172 which provides the complete commentary from verse 172 through 174.

सूरा आयत 174 तफ़सीर (टिप्पणी)