लिप्यंतरण:( Wa qaasamahumaaa innee lakumaa laminan naasiheen )
और उसने दोनों के सामने क़सम खाई कि मैं तुम्हारा सच्चा भला चाहने वाला हूँ [37].
यहाँ से हमें यह सबक़ मिलता है कि दिखावे की परहेज़गारी की पहली मिसाल खुद शैतान ने पेश की। उसके दिल में तो हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) के लिए दुश्मनी भरी हुई थी, मगर उसने बाहरी तौर पर दोस्ती और भलाई का दिखावा किया, और झूठी क़सम खाकर धोखा दिया।
इससे यह सिखाया गया कि इख़लास के नाम पर रिया (दिखावा) करना शैतानी ख़स्लत है।
The tafsir of Surah Al-A’raf verse 21 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah A’raf ayat 19 which provides the complete commentary from verse 19 through 21.

सूरा आयत 21 तफ़सीर (टिप्पणी)