लिप्यंतरण:( Wallazeena yumas sikoona bil Kitaabi wa aqaamus Salaata innaa laa nudeeu'ajral musliheen )
और जिन्होंने किताब [392] को मज़बूती से थामा और नमाज़ क़ायम की — तो हम नेक़ों का अजर ज़ाया नहीं करते।
यह आयत उन यहूदी आलिमों के बारे में नाज़िल हुई जो तौरात की हिफ़ाज़त करते थे, उसे न छुपाते थे और न बदलते थे। जैसे अब्दुल्लाह इब्ने सलाम रह०, जिन्होंने सच्चाई की वजह से इस्लाम क़ुबूल किया और सहाबी बने।
अल्लाह तआला ने साफ़ कर दिया कि जो किताब को थामे रहें और नमाज़ की पाबंदी करें, अल्लाह उनका अजर-ओ-इनाम हरगिज़ ज़ाया नहीं करता।
The tafsir of Surah Al-A’raf verse 170 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah A’raf ayat 168 which provides the complete commentary from verse 168 through 170.

सूरा आयत 170 तफ़सीर (टिप्पणी)