लिप्यंतरण:( Falammaaa aataahumaa saalihan ja'alaa lahoo shurakaaa'a feemaaa aataahumaa; fata'aalal laahu 'ammaa yushrikoon )
फिर जब उसने उन्हें एक अच्छा बच्चा दिया, तो उन्होंने उसके दिए हुए में उसके साथ साझी ठहरा लिए [442]। हालाँकि अल्लाह उनकी साझेदारी से पाक है।
इस आयत में बहुवचन का इस्तेमाल यह साबित करता है कि इसका ताल्लुक हज़रत आदम और हव्वा (अलैहिमस्सलाम) से नहीं है, बल्कि आम मश्रिक माता-पिता से है। नबीगण गुनाह और शिर्क से महफ़ूज़ होते हैं। इसलिए इस आयत में क़ुरैश और उनके बुज़ुर्गों के तौर-तरीक़े का ज़िक्र है, जिन्होंने औलाद मिलने के बाद उनके नाम तक ग़ैर-अल्लाह की ग़ुलामी पर रखे, जैसे: ‘अब्द मनाफ़, ‘अब्दुल उज़्ज़ा, आदि। यह अल्लाह की नेमत का कुफ़्र और शिर्क के साथ जवाब देना था।
The tafsir of Surah Al-A’raf verse 190 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah A’raf ayat 189 which provides the complete commentary from verse 189 through 190.

सूरा आयत 190 तफ़सीर (टिप्पणी)