लिप्यंतरण:( Qaala innaka minal munzareen )
उसने (अल्लाह ने) कहा: "तुझे मोहलत दी गई" [23]
इससे मुराद है कि शैतान को पहले सूर फूंके जाने तक मोहलत दी गई। जब पहला सूर फूंका जाएगा तो शैतान बाक़ी मख़लूक़ात के साथ हलाक कर दिया जाएगा। यानी अल्लाह तआला ने शैतान की दुआ क़ुबूल फ़रमाई, मगर कुछ तब्दीली के साथ।
इससे दो अहम बातें मालूम होती हैं:
ताक़दीर (क़ज़ा-ओ-क़दर) में तब्दीली की तफ़सील के लिए किताबें असरारुल अहकाम और तफ़्सीर नयीमी देखी जा सकती हैं।
The tafsir of Surah Al-A’raf verse 15 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah A’raf ayat 13 which provides the complete commentary from verse 13 through 15.

सूरा आयत 15 तफ़सीर (टिप्पणी)