लिप्यंतरण:( Falammaa nasoo maa zukkiroo bihee anjainal lazeena yanhawna 'anis sooo'i wa akhaznal lazeena zalamoo bi'azaabim ba'eesim bimaa kaanoo yafsuqoon )
फिर जब वे लोग वह नसीहत भुला बैठे जो उन्हें दी गई थी, तो हमने उन लोगों को बचा लिया जो बुराई से रोकते थे, और ज़ालिमों को उनकी नाफ़रमानी के सबब से सख़्त अज़ाब में पकड़ लिया [378]।
इस आयत में तीसरे गिरोह (खामोश रहने वालों) का कोई ज़िक्र नहीं है। इससे इशारा मिलता है कि उन पर अज़ाब नहीं हुआ। अल्लाह का अज़ाब सिर्फ़ उन पर उतरा जिन्होंने खुलकर गुनाह किया और ख़िलाफ़वरज़ी की। इस तरह खामोश लोग न तो गुनाह में शरीक थे और न ही ज़ालिमों के मददगार।
रिवायतों के मुताबिक़ हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) ने गुनहगारों पर लानत की। नतीजा ये हुआ कि एक रात में वे लोग बंदरों में तब्दील कर दिए गए।
अहम बात यह है कि आज के बंदर उनकी नस्ल से नहीं हैं, क्योंकि जिनको अल्लाह तआला इस तरह तब्दील करता है, उनकी औलाद नहीं होती।
The tafsir of Surah Al-A’raf verse 165 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah A’raf ayat 163 which provides the complete commentary from verse 163 through 166.

सूरा आयत 165 तफ़सीर (टिप्पणी)