लिप्यंतरण:( Fabaddalal lazeena zalamoo minhum qawlan ghairal lazee qeela lahum fa arsalnaa 'alaihim rijzan minas samaaa'i bimaa kaanoo yazlimoon )
लेकिन उनमें से ज़ालिमों ने उस कलाम को बदल डाला [370], जो उनसे कहा गया था। तो हमने उनकी नाक़सी के बदले उन पर आसमान से आज़ाब उतार दिया [371]।
उन्होंने तौबा के लिए जो लफ़्ज़ अल्लाह ने बताये थे, उन्हें बदलकर मज़ाक़ बना लिया। इससे सबक़ मिलता है कि अल्लाह और उसके नबी का सिखाया हुआ कलाम ज्यों का त्यों अपनाना चाहिए, उसमें तहरीफ़ करने से असर और बरकत दोनों खत्म हो जाते हैं।
उनकी नाफ़रमानी के सबब अल्लाह ने उन पर आसमान से अज़ाब भेजा। तफ़्सीरों में आता है कि यह अज़ाब ताऊन (प्लेग) की शक्ल में आया, जिससे 24 हज़ार बानी इसराईल हलाक़ हो गए।
इस्लामी तालीमात में ताऊन मुमिनों के लिए रहमत है – जो सब्र करे और उस में वफ़ात पाए, उसे शहीद का दर्जा मिलता है। हदीस शरीफ़ में हुक्म है कि ताऊन वाली जगह में दाख़िल न हो, और अगर अपने शहर में आ जाए तो वहाँ से भागो नहीं।
The tafsir of Surah Al-A’raf verse 162 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah A’raf ayat 160 which provides the complete commentary from verse 160 through 162.

सूरा आयत 162 तफ़सीर (टिप्पणी)