लिप्यंतरण:( Falanaqussanna 'alaihim bi'ilminw wa maa kunnaa ghaaa'ibeen )
फिर बेशक, हम उनसे पूरे ज्ञान के साथ बयान करेंगे, और हम कभी ग़ायब न थे [8]
इसका मतलब यह है कि क़ियामत के दिन काफ़िरों और पैग़म्बरों से अल्लाह का सवाल करना इस लिए होगा कि मामला एक क़ानूनी प्रक्रिया के तहत पूरा हो, न कि इसलिए कि अल्लाह को हक़ीक़त का इल्म न हो। इससे यह भी सबक़ मिलता है कि हज़रत आयशा सिद्दीका (रज़ि.) पर इल्ज़ाम के मामले में नबी ﷺ ने जो तहक़ीक़ की थी, वह भी सिर्फ़ उम्मत की तालीम और मार्गदर्शन के लिए एक प्रक्रिया थी।
The tafsir of Surah Al-A’raf verse 7 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah A’raf ayat 4 which provides the complete commentary from verse 4 through 7.

सूरा आयत 7 तफ़सीर (टिप्पणी)