लिप्यंतरण:( Wa in tad'oohum ilal hudaa laa yasma'oo wa taraahum yanzuroona ilaika wa hum laa yubsiroon )
और अगर तुम उन्हें हिदायत की तरफ बुलाओ तो वे सुनते नहीं, और तुम उन्हें अपनी ओर देखते हुए समझते हो, जबकि वे असल में देखते नहीं [453]।
इस आयत में बताया गया है कि उनकी आँखें खुली हुई प्रतीत होती हैं, मानो वे देख रहे हों, लेकिन असल में वे बेजान पत्थर हैं—न सुन सकते हैं, न देख सकते हैं, न समझ सकते हैं। वे हिदायत की पुकार को नहीं सुनते और न ही कोई जवाब दे सकते हैं।
The tafsir of Surah Al-A’raf verse 198 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah A’raf ayat 191 which provides the complete commentary from verse 191 through 198.

सूरा आयत 198 तफ़सीर (टिप्पणी)