Quran Quote  : 

कुरान मजीद-7:5 सुरा हिंदी अनुवाद, लिप्यंतरण और तफ़सीर (तफ़सीर).

فَمَا كَانَ دَعۡوَىٰهُمۡ إِذۡ جَآءَهُم بَأۡسُنَآ إِلَّآ أَن قَالُوٓاْ إِنَّا كُنَّا ظَٰلِمِينَ

लिप्यंतरण:( Famaa kaana da'waahum iz jaaa'ahum ba'sunaa illaaa an qaalooo innaa kunnaa zaalimeen )

फिर उनका रोना-धोना उस वक़्त, जब हमारा अज़ाब उन पर आ पड़ा, बस यही था कि उन्होंने कहा, निश्चय ही हम ज़ालिम थे [6]

सूरा आयत 5 तफ़सीर (टिप्पणी)



  • मुफ़्ती अहमद यार खान

📖 सूरा अल-आ'राफ़ – आयत 5 की तफ़्सीर

 

✅ [6] अज़ाब के वक़्त की तौबा कबूल नहीं होती

इससे मालूम हुआ कि जब अज़ाब आ जाता है, तो उस समय की तौबा और ईमान कबूल नहीं होते। मायूसी के हालात में पैदा हुआ ईमान सही नहीं माना जाता। हाँ, वह तौबा जो अज़ाब आने से पहले दिली पछतावे और गुनाहों पर अफ़सोस के साथ की जाए, वह अल्लाह के यहाँ मक़बूल होती है।

Ibn-Kathir

The tafsir of Surah Al-A’raf verse 5 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah A’raf ayat 4 which provides the complete commentary from verse 4 through 7.

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