लिप्यंतरण:( Wallazeena tad'oona min doonihee laa yastatee'oona nasrakum wa laaa anfusahum yansuroon )
और जिनको तुम अल्लाह के सिवा पुकारते हो, वे न तो तुम्हारी मदद कर सकते हैं और न अपनी ही मदद कर सकते हैं [452]।
इससे मुराद यह है कि अगर कोई कुत्ता उनकी क़ुर्बानी की चीज़ उठा ले जाए तो वे उसे वापस नहीं छीन सकते, और अगर मक्खियाँ उनके आस-पास मंडराएँ तो वे उन्हें भी नहीं भगा सकते। यह उनकी पूरी बेबस स्थिति को दर्शाता है कि वे न तो इबादत के क़ाबिल हैं और न ही अपने लिए किसी तरह की मदद कर सकते हैं।
The tafsir of Surah Al-A’raf verse 197 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah A’raf ayat 191 which provides the complete commentary from verse 191 through 198.

सूरा आयत 197 तफ़सीर (टिप्पणी)