लिप्यंतरण:( Innamaa yastajeebul lazeena yasma'oon; walmawtaa yab'asuhumul laahu summa ilaihi yurja'oon )
सिर्फ़ वही लोग (बात) क़ुबूल करते हैं जो सुनते हैं [72], और अल्लाह मुर्दों को उठाएगा [73], फिर सब उसी की तरफ़ लौटाए जाएँगे।
सिर्फ़ वे ही लोग जवाब देते हैं जो सुनते हैं — इसका मतलब है दिल से सुनना, जो इंसान को ईमान और आज्ञाकारिता की तरफ़ ले जाए। जिन लोगों ने हक़ को ठुकरा दिया, वो रूहानी तौर पर मुर्दा हैं, क्योंकि उनके दिल हिदायत के लिए बंद हो चुके हैं। यह आयत उन मुस्लिम दिलों को अलग करती है जो हक़ के लिए खुले हुए हैं, उन लोगों से जो जिस्म से ज़िंदा लेकिन रूह से मरे हुए हैं।
अल्लाह मुर्दों को ज़िंदा करेगा, मगर यह दोबारा ज़िंदगी हिदायत देने के लिए नहीं, बल्कि हिसाब और सज़ा के लिए होगी। जिन लोगों के दिल दुनिया में मुर्दा थे, उन्हें मरने के बाद कोई दूसरा मौका नहीं मिलेगा। यह उठाया जाना सिर्फ़ सज़ा और फैसला सुनाने के लिए होगा। आख़िर में सबको अल्लाह के पास लौटाया जाएगा, जहां आख़िरी फ़ैसला होगा।
The tafsir of Surah Al-Anam verse 36 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Anam ayat 33 which provides the complete commentary from verse 33 through 36.

सूरा आयत 36 तफ़सीर (टिप्पणी)