लिप्यंतरण:( Falammmaa ra al qamara baazighan qaala haazaa Rabbee falammaaa afala qaala la'il lam yahdinee Rabbee la akoonanna minal qawmid daaalleen )
फिर जब उसने चाँद को निकलते देखा, तो कहा: यह मेरा रब है। फिर जब वह डूब गया, तो कहा: अगर मेरा रब मुझे हिदायत न देता, तो मैं भी ज़रूर गुमराह लोगों में से हो जाता [155]।
हज़रत इब्राहीम عليه السلام ने अपने लोगों के सितारों और चाँद की पूजा के तरीक़े को तार्किक ढंग से खारिज किया। उनका यह कहना — "अगर मेरा रब मुझे हिदायत न देता" — अल्लाह के सामने विनम्रता का इज़हार था, लेकिन साथ ही यह दावा भी कि वह पहले से अल्लाह की हिदायत पर हैं। इसका मतलब यह है कि बिना अल्लाह की हिदायत के इंसान गुमराह हो जाता है, मगर इब्राहीम عليه السلام को अल्लाह ने शुरू से ही सच्ची राह दिखा दी थी, इसीलिए वह कभी गुमराहों में से नहीं हुए।
The tafsir of Surah Al-Anam verse 77 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Anam ayat 74 which provides the complete commentary from verse 74 through 79.

सूरा आयत 77 तफ़सीर (टिप्पणी)