Quran Quote  : 

कुरान मजीद-6:89 सुरा हिंदी अनुवाद, लिप्यंतरण और तफ़सीर (तफ़सीर).

أُوْلَـٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ ءَاتَيۡنَٰهُمُ ٱلۡكِتَٰبَ وَٱلۡحُكۡمَ وَٱلنُّبُوَّةَۚ فَإِن يَكۡفُرۡ بِهَا هَـٰٓؤُلَآءِ فَقَدۡ وَكَّلۡنَا بِهَا قَوۡمٗا لَّيۡسُواْ بِهَا بِكَٰفِرِينَ

लिप्यंतरण:( Ulaaa'ikal lazeena aatainaahumul Kitaaba wal hukma wan Nubuwwah; fa iny yakfur bihaa haaa'ulaaa'i faqad wakkalnaa bihaa qawmal laisoo bihaa bikaafireen )

ये वे लोग हैं जिन्हें हमने किताब [177], हुक्म और नुबूवत दी [178]। फिर अगर ये लोग इसे ठुकरा दें [179], तो हम इसे ऐसे लोगों के सुपुर्द कर चुके हैं जो इसे ठुकराएँगे नहीं [180]

सूरा आयत 89 तफ़सीर (टिप्पणी)



  • मुफ़्ती अहमद यार खान

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 89 की तफ़्सीर

✅ [177] हर नबी को पूरी किताब नहीं दी गई

यहाँ किताब से मुराद कोई भी इलाही किताब है—चाहे पूरी हो, सहिफ़ों की शक्ल में हो, या हिस्सों में नाज़िल हुई हो। हर नबी को पूरी किताब नहीं दी गई; कुछ जैसे हारून और दाऊद عليهم السلام ने मूसा عليه السلام पर नाज़िल तौरात की तालीम दी। कुछ, जैसे आदम عليه السلام को सहिफ़े दिए गए, जिन्हें बाद के नबी आगे पहुँचाते रहे।

✅ [178] नबी मुकम्मल और हिकमत वाले होते हैं

यह आयत बताती है कि हर नबी के पास इलाही इल्म और हिकमत होती है, जिसमें किताबों को समझना और सिखाना शामिल है। कुछ पिछले वही की तालीम देते हैं, लेकिन कोई भी नबी नुबूवत में दूसरे का मातहत नहीं होता। हर नबी मुकम्मल और अल्लाह के चुने हुए होते हैं।

✅ [179] इंकार करने वाले ज़िद्दी काफ़िर हैं

यहाँ इंकार से मुराद मक्का के काफ़िर, ख़ास तौर पर क़ुरैश के सरदार हैं, जिन्होंने हक़ और मौजिज़ात देखकर भी आख़िरी दम तक इंकार किया। उनका इंकार पक्का और जानबूझकर था।

✅ [180] अल्लाह इंकार करने वालों की जगह वफ़ादार लाएगा

अल्लाह फ़रमा रहा है कि अगर मौजूदा लोग हक़ को ठुकराएँ, तो वह इसे ऐसे लोगों के हवाले कर देगा जो इसे कभी ठुकराएँगे नहीं। यह पेशीनगोई सहाबामुहाजिरीन, अंसार और आने वाली नेक नस्लों—के ज़रिये पूरी हुई, जिन्होंने इस्लाम को फैलाया और सँभाला। यह सिखाती है कि दीनी खिदमत एक इलाही इनाम है, हक़ नहीं, और इसे शुक्र और आज़्माइश के साथ निभाना चाहिए।

Ibn-Kathir

The tafsir of Surah Al-Anam verse 89 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Anam ayat 84 which provides the complete commentary from verse 84 through 90.

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