लिप्यंतरण:( Wa anzir bihil lazeena yakhaafoona ai yuhsharooo ilaa Rabbihim laisa lahum min doonihee waliyyunw wa laa shafee'ul la'allahum yattaqoon )
और इस क़ुरआन के ज़रिए उन्हें डराओ जो इस बात से डरते हैं कि वे अपने रब की तरफ़ उठाए जाएँगे — उनके लिए अल्लाह के सिवा कोई सहायक [100] और कोई सिफ़ारिश करने वाला नहीं होगा — ताकि वे परहेज़गार बन जाएँ।
यह आयत उन लोगों के लिए चेतावनी है जो आख़िरत पर ईमान रखते हैं और अपने रब के सामने उठाए जाने से डरते हैं। इसमें बताया गया है कि उनके लिए अल्लाह के अलावा कोई मददगार या सिफ़ारिश करने वाला नहीं होगा। इससे यह समझ आता है कि ईमानवालों को अल्लाह की रहमत से सिफ़ारिश करने वाले मिलेंगे, जबकि काफ़िरों को इससे महरूम रखा जाएगा — और यही उनकी सज़ा का हिस्सा है। इसलिए अगर कोई कहे कि उसका कोई सिफ़ारिश करने वाला नहीं है, तो वह दरअसल कुफ़्र की हालत को बयान कर रहा है। आयत नरमी से लोगों को परहेज़गार बनने की तरग़ीब देती है ताकि वे उस दिन अकेले न छोड़ दिए जाएँ।
The tafsir of Surah Al-Anam verse 51 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Anam ayat 50 which provides the complete commentary from verse 50 through 54.

सूरा आयत 51 तफ़सीर (टिप्पणी)