लिप्यंतरण:( Qul law anna 'indee maa tasta'jiloona bihee laqudiyal amru bainee wa bainakum; wallaahu a'lamu bizzaalimeen )
कह दीजिए: अगर वह चीज़ मेरे पास होती जिसके लिए तुम जल्दी मचा रहे हो, तो मेरे और तुम्हारे बीच मामला फ़ैसला कर दिया गया होता [118]। और अल्लाह ज़ालिमों को अच्छी तरह जानता है।
कुफ़्फ़ार अज़ाब की जल्दी मचाते थे और नबी ﷺ से कहते थे कि अगर आप सच्चे हैं तो वह अज़ाब ला दिखाइए। इस आयत में जवाब मिला कि अगर यह इख़्तियार नबी ﷺ को दिया गया होता तो ऐसे दुश्मनों से ज़मीन को पहले ही पाक कर दिया जाता और फ़ैसला फ़ौरन हो जाता। नबी ﷺ का मिज़ाज अल्लाह के फ़रमान के मुताबिक़ है — "काफ़िरों पर सख़्त और आपस में रहमदिल" (सूरा 48:29)। लेकिन अज़ाब का हुक्म सिर्फ़ अल्लाह के हाथ में है। वह ज़ालिमों को पूरी तरह जानता है और उसका इंसाफ़ बिना वजह कभी देर से नहीं आता।
The tafsir of Surah Al-Anam verse 58 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Anam ayat 55 which provides the complete commentary from verse 55 through 59.

सूरा आयत 58 तफ़सीर (टिप्पणी)