लिप्यंतरण:( Wa maa 'alal lazeena yattaqoona min hisaabihim min shai'inw wa laakin zikraa la'allahum yattaqoon )
और परहेज़गारों पर कोई हिसाब नहीं है, मगर यह तो एक नसीहत है, ताकि वे होशियार हो जाएँ [137]।
इस आयत में स्पष्ट किया गया है कि परहेज़गार लोग जब दावत या बहस के लिए बैठते हैं, तो काफ़िरों के गुनाहों का हिसाब उनके ऊपर नहीं होगा। उनका फ़र्ज़ है कि हिकमत से पैग़ाम पहुँचाएँ और लोगों को हक़ की याद दिलाएँ। गैर-मुसलमानों के बीच दावत-ए-हक़ के लिए बैठना न सिर्फ़ जायज़ है, बल्कि यह रूहानी फ़ायदे और दिलों की बیدारी का ज़रिया बन सकता है।
The tafsir of Surah Al-Anam verse 69 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Anam ayat 66 which provides the complete commentary from verse 66 through 69.

सूरा आयत 69 तफ़सीर (टिप्पणी)