लिप्यंतरण:( Faquti'a daabirul qawmil lazeena zalamoo; walhamdu lillaahi Rabbil 'aalameen )
फिर ज़ालिम लोग जड़ से उखाड़ दिए गए [89]। और सब तरह की तारीफ़ अल्लाह के लिए है, जो सारे जहानों का रब है [90]।
यह आयत उन क़ौमों की पूरी तबाही की तरफ़ इशारा करती है जिन पर अल्लाह का अज़ाब उतरा। वे इस क़दर ख़त्म कर दिए गए, कि उनकी कोई औलाद या नस्ल भी बाक़ी नहीं रही। जिनको जानवरों (बंदर या सूअर) में तब्दील किया गया था, वे भी पूरी तरह मिटा दिए गए — आज के जानवर उनकी नस्ल से नहीं हैं। यह नस्ल का क़तअ होना, अल्लाह की तरफ़ से एक सख़्त सज़ा और इबरत है।
आयत के आख़िर में "अल्हम्दु लिल्लाह" कहा गया है — ताकि समझा जाए कि ज़ालिमों की हलाकत कोई मातम नहीं, बल्कि हक़ की फ़तह और झूठ की शिकस्त है।
हुज़ूर ﷺ ने अबू जहल की मौत पर सजदा किया था, और आशूरा के दिन रोज़ा रखने का हुक्म दिया — क्योंकि उसी दिन फ़िरऔन हलाक हुआ था।
इससे ये उसूल मालूम हुआ:
The tafsir of Surah Al-Anam verse 45 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Anam ayat 40 which provides the complete commentary from verse 40 through 45.

सूरा आयत 45 तफ़सीर (टिप्पणी)