Quran Quote  : 

कुरान मजीद-6:38 सुरा हिंदी अनुवाद, लिप्यंतरण और तफ़सीर (तफ़सीर).

وَمَا مِن دَآبَّةٖ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَلَا طَـٰٓئِرٖ يَطِيرُ بِجَنَاحَيۡهِ إِلَّآ أُمَمٌ أَمۡثَالُكُمۚ مَّا فَرَّطۡنَا فِي ٱلۡكِتَٰبِ مِن شَيۡءٖۚ ثُمَّ إِلَىٰ رَبِّهِمۡ يُحۡشَرُونَ

लिप्यंतरण:( Wa maa min daaabbatin fil ardi wa laa taaa'iriny yateeru bijanaahaihi illaaa umamun amsaalukum; maa farratnaa fil Kitaabi min shaiyy' summa ilaa Rabbihim yuhsharoon )

और ज़मीन पर कोई भी चलने वाला जीव और कोई भी परिंदा जो अपने पंखों से उड़ता है, ऐसा नहीं है जो तुम्हारे जैसे गिरोहों में से न हो [76]। हमने किताब में कोई चीज़ छोड़ी नहीं है [77]। फिर, सब अपने रब की ओर लौटाए जाएँगे।

सूरा आयत 38 तफ़सीर (टिप्पणी)



  • मुफ़्ती अहमद यार खान

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 38 की तफ़्सीर

✅ [76] नबी ﷺ का विशेष और उच्च दर्जा

यह आयत बताती है कि हर जीव, चाहे वो ज़मीन पर चलता हो या परिंदा हो, एक व्यवस्थित समुदाय में है — ठीक इंसानों की तरह। मगर इसी संदर्भ में यह भी स्पष्ट होता है कि पैग़म्बर ﷺ को आम इंसान कहना अनुचित है, जैसे कि जानवरों को इंसानों जैसा कहने के बावजूद उनकी तुलना इंसानों से नहीं की जा सकतीनबी ﷺ का दर्जा साधारण मख़लूक़ से कहीं ऊँचा है। जैसे कि अल्लाह ने फ़रमाया: उसके नूर की मिसाल उस ताक़ जैसी है जिसमें चिराग़ हो (सूरा 24:35)। अगर अल्लाह के नूर की तुलना दुनिया के नूर से नहीं की जा सकती, तो नुबुव्वत के नूर की तुलना आम इंसानों से कैसे की जा सकती है?

✅ [77] इलाही ज्ञान का पूरा लेखा-जोखा

यहाँ “किताब” से मुराद या तो कुरआन है या लौह-ए-महफ़ूज़ (संरक्षित पट्टिका)। इसका मतलब है कि कोई भी अहम इलाही हिदायत किताब से छूटी नहीं है — हर ज़रूरी बात दर्ज है। ये किताबें न सिर्फ़ इंसानों के लिए रहनुमाई हैं, बल्कि यह भी साबित करती हैं कि नबी ﷺ को पूरा इलाही ज्ञान अता किया गया। चूँकि अल्लाह कुछ नहीं भूलता, लिहाज़ा इल्म का लेखा-जोखा याद रखने के लिए नहीं, बल्कि इज़हार और पैग़म्बरी के ज़रिये पहुँचाने के लिए किया गया है — ताकि यह इल्म नबी ﷺ के ज़रिये पूरी दुनिया तक पहुँचे

Ibn-Kathir

The tafsir of Surah Al-Anam verse 38 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Anam ayat 37 which provides the complete commentary from verse 37 through 39.

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